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प्रवेश के नियम

  • किसी भी कक्षा में प्रवेश योग्यता के आधार पर निर्धारित होगा, न कि किसी वर्ग, जाति व धर्म के आधार पर, किंतु अनुसूचित जातियों, जनजातियों तथा पिछड़ी जाति की छात्राओं की क्रमशः 21% तथा 2% तथा 27% सीट सुरक्षित रहेंगी, और न्यूनतम अहर्ता संपन्न छात्राओं द्वारा अपेक्षित संख्या में प्रवेश के लिए आवेदन न करने पर शेष सीटें अन्य छात्राओं द्वारा भरी जा सकती हैं। महाविद्यालय स्टाफ को 4% अधिभार प्रवेश में दिया जाएगा। प्रवेश के लिए जिन छात्राओं के नाम घोषित किए जाते हैं उन्हें निर्धारित अवधि के अंदर प्रवेश लेना होगा अन्यथा महाविद्यालय को यह अधिकार है कि वरीयता क्रम में प्रतीक्षा करने वाली छात्राओं को प्रवेश दे दे। अपंग 1% स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित 2% भूतपूर्व सैनिक के लिए 1% आरक्षण है। 10% आरक्षण ई.डब्ल्यू.एस के लिए लागू होगा।
  • किसी भी सेक्शन में 60 /80 से अधिक छात्राओं को प्रवेश नहीं दिया जाएगा ।
  • कोई भी छात्राएं में बीए कक्षा में तब तक प्रवेश करने की अधिकारी नहीं होगी जब तक उसने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद या प्रचलित कानून द्वारा मान्यता प्राप्त किसी महाविद्यालय, इंटर बोर्ड की परीक्षा अथवा किसी विद्यालय द्वारा इंटर कॉलेज के समकक्ष मान्यता प्राप्त अन्य परीक्षा उत्तीर्ण न की हो।
  • कोई भी छात्रा महाविद्यालय की सदस्य मानी जाएगी जब उसके प्रवेश के लिए किया गया आवेदन पत्र नियमों के अनुसार प्राचार्य द्वारा स्वीकृत हो जाए तथा महाविद्यालय द्वारा निर्धारित शुल्क एवं प्राचार्या द्वारा मांगे गए पत्र जैसे स्थानांतरण प्रमाण पत्र, प्रवजन प्रमाण पत्र आदि जमा कर दें ।यदि किसी कारणवश छात्रा उपरोक्त प्रमाण पत्र जमा कराने में असमर्थ है तो उसे प्राचार्य द्वारा इस शर्त पर अस्थाई प्रवेश की अनुमति दी जाएगी कि वह उक्त पत्रों को परीक्षा आवेदन पत्र भरने से पूर्व जमा करा दे। अन्यथा उसके प्रवेश की पुष्टि नहीं होगी।
  • छात्राओं का विषय परिवर्तन करना सरलता से संभव नहीं होगा ।
  • प्राचार्या ऐसी किसी भी छात्रा को महाविद्यालय में प्रवेश से वंचित कर सकती है जिसका प्रवेश महाविद्यालय अनुशासन के हित में न हो ।
  • प्रवेश हेतु आवेदन पत्र निर्धारित तिथि तक जमा कराना अनिवार्य होगा ।
  • यदि एम.ए., गैर प्रायोगिक विषय के प्रवेश हेतु ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने स्नातक स्तर पर संबंधित विषय परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है प्रवेश हेतु आवेदन करती है तो योग्यता सूची तैयार करते समय अभ्यर्थी के कुल प्राप्तांक प्रतिशत से 5% की कटौती की जाएगी।
नोट:- चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा जारी मेरिट लिस्ट के अनुसार ही प्रवेश दिए जाएंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

"राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत प्रवेश संबंधी दिशा निर्देश"(National Education Policy 2020: Guidelines For Admission)

  • यह व्यवस्था तीन विषय वाले बी.ए. एवं बी.कॉम. में सत्र 2021- 2022 से प्रवेशित छात्राओं पर लागू होगी।
  • छात्राओं को स्नातक में प्रवेश के समय सर्वप्रथम महाविद्यालय में एक संकाय (कला, वाणिज्य आदि) का चुनाव करना होगा। यह संकाय छात्राओं का अपना संकाय कहलाएगा। जिसमें वे तीन वर्ष तक अध्ययन कर सकेगीं।
  • पूर्व व्यवस्था की भांति ही छात्राओं को कुल तीन मुख्य विषयों का अध्ययन करना होगा तथा एक अन्य माइनर विषय का चयन वह अपने संकाय अथवा दूसरे संकाय से कर सकती हैं। जिसका आवंटन मेरिट, संबंधित महाविद्यालय में उपलब्ध सीट संख्या एवं संसाधनों पर निर्भर होगा।
  • छात्राओं को महाविद्यालय में विषयों की उपलब्धता के आधार पर नियमानुसार विषय परिवर्तन की सुविधा होगी परंतु वे एक वर्ष के बाद ही विषय परिवर्तित कर सकती हैं। एक सेमेस्टर के बाद नहीं।
  • तीन मुख्य विषयों के अतिरिक्त छात्राओं को एक गौण (माइनर इलेक्टिव) विषय का अध्ययन करना होगा। इस विषय का चुनाव भी वह अपने संकाय अथवा दूसरे संकाय से कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें किसी पूर्व पात्रता की आवश्यकता नहीं होगी। स्नातक की छात्राओं को प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में मात्र दो गौण (माइनर) विषयों का अध्ययन करना होगा।
  • बहुविषयकता सुनिश्चित करने के लिए स्नातक स्तर पर माइनर इलेक्टिव पेपर सभी छात्राओं को किसी भी चौथे विषय (उनके द्वारा लिए गए तीन मुख्य विषयों के अतिरिक्त) से लेना होगा।
  • तीसरे मुख्य विषय (मेजर) तथा गौण विषय चयनित पेपर (माइनर इलेक्टिव पेपर) का चयन छात्राओं को इस प्रकार करना होगा कि इनमें से कोई एक अनिवार्यत: अपने संकाय के अतिरिक्त अन्य संकाय (other faculty) से हो।
  • कोई छात्रा एक माइनर इलेक्टिव पेपर स्नातक प्रथम वर्ष के प्रथम अथवा द्वितीय सेमेस्टर में तथा दूसरा माइनर इलेक्टिव पेपर द्वितीय वर्ष के तृतीय अथवा चतुर्थ सेमेस्टर में ले सकती है। अर्थात विद्यार्थी अपनी सुविधा से सम अथवा विषम सेमेस्टर में उपलब्ध माइनर इलेक्टिव पेपर का चुनाव कर सकता है।
  • विश्वविद्यालय/ महाविद्यालय द्वारा उपलब्ध सीटों के आधार पर माइनर इलेक्टिव पेपर आवंटित किया जाएगा।
  • प्रत्येक विद्यार्थी को प्रथम 2 वर्षों (4 सेमेस्टर) के प्रत्येक सेमेस्टर में 3 क्रेडिट (3×4 =12 क्रेडिट के कुल चार पाठ्यक्रम) एक रोजगारपरक /कौशल विकास पाठ्यक्रम पूर्ण करना होगा।
  • स्नातक स्तर की प्रत्येक विद्यार्थी को तीन वर्षों (6 सेमेस्टर ) के प्रत्येक सेमेस्टर में एक सह पाठ्यक्रम करना अनिवार्य होगा।