Quick Inquiry
Announcement

Announcement..........................

×

राष्ट्रीय शिक्षा नीति

राष्ट्रीय शिक्षा नीति

"राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत प्रवेश संबंधी दिशा निर्देश"(National Education Policy 2020: Guidelines For Admission)

  • यह व्यवस्था तीन विषय वाले बी.ए. एवं बी.कॉम. में सत्र 2021- 2022 से प्रवेशित छात्राओं पर लागू होगी।
  • छात्राओं को स्नातक में प्रवेश के समय सर्वप्रथम महाविद्यालय में एक संकाय (कला, वाणिज्य आदि) का चुनाव करना होगा। यह संकाय छात्राओं का अपना संकाय कहलाएगा। जिसमें वे तीन वर्ष तक अध्ययन कर सकेगीं।
  • पूर्व व्यवस्था की भांति ही छात्राओं को कुल तीन मुख्य विषयों का अध्ययन करना होगा तथा एक अन्य माइनर विषय का चयन वह अपने संकाय अथवा दूसरे संकाय से कर सकती हैं। जिसका आवंटन मेरिट, संबंधित महाविद्यालय में उपलब्ध सीट संख्या एवं संसाधनों पर निर्भर होगा।
  • छात्राओं को महाविद्यालय में विषयों की उपलब्धता के आधार पर नियमानुसार विषय परिवर्तन की सुविधा होगी परंतु वे एक वर्ष के बाद ही विषय परिवर्तित कर सकती हैं। एक सेमेस्टर के बाद नहीं।
  • तीन मुख्य विषयों के अतिरिक्त छात्राओं को एक गौण (माइनर इलेक्टिव) विषय का अध्ययन करना होगा। इस विषय का चुनाव भी वह अपने संकाय अथवा दूसरे संकाय से कर सकती हैं। इसके लिए उन्हें किसी पूर्व पात्रता की आवश्यकता नहीं होगी। स्नातक की छात्राओं को प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में मात्र दो गौण (माइनर) विषयों का अध्ययन करना होगा।
  • बहुविषयकता सुनिश्चित करने के लिए स्नातक स्तर पर माइनर इलेक्टिव पेपर सभी छात्राओं को किसी भी चौथे विषय (उनके द्वारा लिए गए तीन मुख्य विषयों के अतिरिक्त) से लेना होगा।
  • तीसरे मुख्य विषय (मेजर) तथा गौण विषय चयनित पेपर (माइनर इलेक्टिव पेपर) का चयन छात्राओं को इस प्रकार करना होगा कि इनमें से कोई एक अनिवार्यत: अपने संकाय के अतिरिक्त अन्य संकाय (other faculty) से हो।
  • कोई छात्रा एक माइनर इलेक्टिव पेपर स्नातक प्रथम वर्ष के प्रथम अथवा द्वितीय सेमेस्टर में तथा दूसरा माइनर इलेक्टिव पेपर द्वितीय वर्ष के तृतीय अथवा चतुर्थ सेमेस्टर में ले सकती है। अर्थात विद्यार्थी अपनी सुविधा से सम अथवा विषम सेमेस्टर में उपलब्ध माइनर इलेक्टिव पेपर का चुनाव कर सकता है।
  • विश्वविद्यालय/ महाविद्यालय द्वारा उपलब्ध सीटों के आधार पर माइनर इलेक्टिव पेपर आवंटित किया जाएगा।
  • प्रत्येक विद्यार्थी को प्रथम 2 वर्षों (4 सेमेस्टर) के प्रत्येक सेमेस्टर में 3 क्रेडिट (3×4 =12 क्रेडिट के कुल चार पाठ्यक्रम) एक रोजगारपरक /कौशल विकास पाठ्यक्रम पूर्ण करना होगा।
  • स्नातक स्तर की प्रत्येक विद्यार्थी को तीन वर्षों (6 सेमेस्टर ) के प्रत्येक सेमेस्टर में एक सह पाठ्यक्रम करना अनिवार्य होगा।